How to Reach Haridwar From Delhi - मेरी दिल्ली से हरिद्वार यात्रा – एक व्यक्तिगत अनुभव
मैं कई बार हरिद्वार गया हूँ, लेकिन सच कहूँ तो गंगा आरती कभी नहीं देखी थी। इस बार सोचा कि चलो, समय निकालते हैं और शाम की गंगा आरती भी देखेंगे। पहले भी मंदिर और घाट देख चुका था, लेकिन इस बार का अनुभव अलग ही था।
मैं Dwarka में रहता हूँ, तो दिल्ली से निकलना आसान था। सबसे पहले Blue Line Metro से Rajeev Chowk पहुँचा, फिर Yellow Line में बदलकर Kashmere Gate Metro Station। Gate No. 7 से बाहर निकलकर Maharana Pratap Bus Adda गया और Uttarakhand Parivahan की बस पकड़ी। बस लगभग 5–6 घंटे में हरिद्वार पहुँच गई। रास्ता mostly smooth था, बस कभी-कभी traffic में फंस गई।
हरिद्वार पहुँचते ही बाहर की ठंडी हवा और घाटों का नज़ारा ने सारी थकान भूलवा दी। सबसे पहले मैंने हर की पौड़ी देखा। भाई, जो scene था, वो शब्दों में बताना मुश्किल है। शाम की गंगा आरती में लोग दीपक और फूल लेकर घाट पर खड़े थे, पुजारी मंत्रोच्चार कर रहे थे, और घाट पर छोटे-छोटे दीप तैर रहे थे। मैं वहीं खड़ा रहा, गंगा की आवाज़ सुनता रहा और सोचता रहा – “इतना साल बाद मैं ये देख रहा हूँ, ये experience मिस नहीं करना चाहिए।”
मैंने कचौड़ी, समोसा और लस्सी ट्राई किया। घाट के पास बनने वाला हलवा सच में लाजवाब था। Chotiwala और Hoshiyar Puri में राजमा-चावल खाया – स्वाद ऐसा कि अब भी याद आता है। Street food हमेशा safe जगह से लेना चाहिए, वरना problem हो सकती है।
दिल्ली से हरिद्वार कैसे पहुँचना
- बस: कश्मीरी गेट से Uttarakhand Parivahan की बसें, 5–6 घंटे में पहुँचती हैं।
- ट्रेन: Haridwar Railway Station पर Shatabdi, Jan Shatabdi जैसी ट्रेनें आती हैं। Advance booking recommended।
- हवाई: Jolly Grant Airport, Dehradun (35 km दूर), टैक्सी या बस से हरिद्वार।
सबसे अच्छा समय और त्योहार
- सर्दियाँ (अक्टूबर–मार्च): आरामदायक मौसम, ठंडी हवा, घाटों का मज़ा।
- गर्मियाँ (अप्रैल–जून): सुबह-शाम घूमना मजेदार।
- मानसून (जुलाई–सितंबर): बारिश में घाट सुंदर, सावधानी जरूरी।
त्योहार:
- Ganga Dussehra – गंगा आरती और घाटों का उत्सव।
- Kumbh Mela – हर 12 साल में, भीड़ बहुत होती है, माहौल अद्भुत।
प्रमुख पर्यटन स्थल
- हर की पौड़ी: शाम की गंगा आरती।
- मनसा देवी मंदिर: ऊपर से शहर और घाट का नज़ारा।
- चंडी देवी मंदिर: केबल कार ride और panoramic view।
- मन्दाकिनी घाट और मुक्तेश्वर आश्रम: शांति और ध्यान के लिए।
- Hidden Gems: Nehru Garden, छोटे local cafes।
स्थानीय अनुभव
- Adventure: Rishikesh में river rafting।
- Yoga & Meditation: Triveni Ghat पर।
- Local culture: घाटों की हलचल, लोगों से बातचीत।
- Challenges: भीड़ में patience रखना, सर्दियों में ठंड से बचना।
स्थानीय परिवहन
- ऑटो और e-rickshaw छोटा सफर के लिए convenient।
- पैदल घूमना घाटों और नज़दीकी जगहों के लिए best।
- साइकिल rental भी ट्रेकिंग या पास के स्थल घूमने के लिए अच्छा।
हरिद्वार सिर्फ घूमने का शहर नहीं है। घाटों की शांति, मंदिरों का माहौल, local खाना और लोगों की सादगी – सब मिला कर यह अनुभव मेरे लिए बहुत खास रहा। और हाँ, अगली बार जब हरिद्वार जाएँ, शाम की गंगा आरती हर की पौड़ी पर जरूर देखें।

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